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Description
श्री शिव गीता
जिस प्रकार भगवान् कृष्ण के मुख से ‘भगवद् गीता’ निकली उसी प्रकार भगवान् शिव की मुखारविन्द से निकली यह ‘शिव गीता’ है।
शिव गीता अध्यात्म विद्या का असामान्य ग्रन्थ है जिसमें वेदान्त का सार समाहित है। वेदान्त में जिसे ब्रह्म कहा गया है उसी को इसमें शिव कहा गया है। जिस प्रकार भगवान् कृष्ण को पूर्णब्रह्म कहा गया है उसी प्रकार शिव भी पूर्णब्रह्म हैं। वही इस सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता व संहारक हैं। यह सम्पूर्ण सृष्टि उसी की शक्ति का रूप है। वेदान्त जिसे मायाशक्ति कहता है वही शिव की शक्ति है। इस मायाशक्ति के पार जाकर उस परब्रह्म का ज्ञान हो जाना ही मुक्ति का एकमात्र उपाय है। इसी ज्ञान के लिए भगवान् शिव ने ब्रह्म, व शिव से सृष्टि रचना का वर्णन, शरीर रचना का वर्णन, शिव साधना, शिव पूजा का विधान, संसार की असारता, तत्त्व ज्ञान, कर्मफल, विरजा दीक्षा, शिव का विराट् स्वरूप, शिव की विभूतियाँ, जीव की गति, मुक्ति का स्वरूप, भक्ति की विधि, ध्यान योग आदि अनेक आध्यात्मिक रहस्यों का उद्घाटन इस गीता में किया गया है।
जिस प्रकार अर्जुन के प्रश्नों के उत्तर में भगवद् गीता सामने आई उसी प्रकार भगवान् राम के द्वारा किए गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर में यह शिव जीता सामने आई।
इसी दृष्टि से शिव गीता का महत्व सर्वाधिक है। ज्ञान प्राप्ति के जिज्ञासुओं के लिए यह ग्रन्थ अति महत्वपूर्ण है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2015 |
| Pulisher |











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